आयुर्वेदिक औषधि या दवाओं के सेवन की अवधि 3 महीने के लिए ही जरूरी क्यों - Why is the duration of the use of herbal medicine necessary for 3 months only


किसी भी आयुर्वेदिक औषधि या दवाओं को सिर्फ तीन महीने के लिए सेवन करने के लिए ही कहा जाता हैं !!!!


😮ऐसा क्यों????

आइये जानते हैं ➤

ये विचार कई लोगो के मन में आता है कि अक्सर आयुर्वेदिक दवाई सिर्फ 3 महीने के लिए ही सेवन करने के लिए क्यों कहा जाता है।

सबसे पहले मैं आपको ये बता दूं की सिर्फ तीन महीने ही नहीं बल्कि अक्सर तीन महीने या उस से ज्यादा दिनों के लिए ही सेवन करने के लिए कहा जाता है। कई बार चार महीने, या 5–6 महीने लेने की सलाह दी जाती है।

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अक्सर यह सवाल उठता है कि आयुर्वेदिक दवाएं कैसे असर करती हैं। क्या इनके कुछ साइड इफेक्ट्स भी होते हैं? क्यों इस इतना ज्यादा समय तक लें की जरूरत है?

आयुर्वेदिक एक्सपर्ट के मुताबिक कोई भी आयुर्वेदिक दवा खाते ही अपना असर नहीं दिखाती। इसमें समय लगता है, लेकिन यह बीमारी को जड़ से दूर करने में मदद करती है।

आयुर्वेदिक दवा पहले शरीर की उन कमजोरियों को दूर करती हैं जिसके कारण आपको कोई हेल्थ प्रॉब्लम हुई है। ऐसी बहुत ही कम आयुर्वेदिक दवा हैं जो एक हफ्ते से पहले असर दिखाने लगती हैं।

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कई बार बीमारी ठीक होने में एक महीने से लेकर साल भर भी लग जाता है। लेकिन कम से कम तीन महीने कोई भी आयुर्वेदिक दवा लेने से उसका पूरा असर आपके शरीर पर होने लगता है। इसलिए कहा जाता है कि कम से कम तीन महीने लीजिए। ये शायद ही कहा जाता है कि सिर्फ तीन महीने ही लेनी है।

तीन महीनों में वो शरीर में जड़ से बीमारी को ठीक कर देती है लेकिन अगर आप उसी दवा को एक या दो महीने और भी फालतू ले लेते है तो ये आपके लिए ही अच्छा है। आने वाले टाइम में कभी भी वो बीमारी पलट कर नहीं आएगी। ये आपको फायदा ही करेगी। नुकसान किसी भी तरह का नहीं करेगी। बशर्ते वो दवाई शुद्ध औषधियों से ही बनी हो। ना की उसमे किसी भी तरह की मिलावट हो।

आयुर्वेदिक दवाओं का प्रभाव ज्यादा टिकाऊ होता है। ये रोग की गहराई में जाकर उसे जड़ से खत्म करती है। अधिकांश दवाएं नेचुरल हर्ब्स से बनती हैं। इसलिए इसके रिएक्शन और साइड इफेक्ट्स भी काफी कम होते हैं। या फिर होते ही नहीं। इसलिए डॉक्टर्स भी एलोपेथी के बजाय आयुर्वेदिक मेडिसिन पर ज्यादा जोर देते हैं।

आयुर्वेदिक दवाएं इम्युनिटी बढ़ाती है। बीमारी से प्रिवेंट करती है। बीमारी को जड़ से खत्म करती है। इलाज के बाद रिहैबिलिटेशन में मददगार है। आयुर्वेदिक दवाओं का सबसे जरूरी काम बीमारी को जड़ से खत्म करना होता हैं। इसी वजह से उसमे वक़्त लगता है। जो बीमारी शरीर में कई सालो से घर कर चुकी होती है। जिसे दूर नामुमकिन ही होता हैं। वही आयुर्वेदिक दवाएं उसे जड़ से खत्म करने का दम रखती है। 

आयुर्वेदिक दवाओं के नुकसान:

  • बीमारी दूर होने में लंबा वक्त लगता है।
  •  कई जड़ी बूटियां काफी महंगी होती है। 
  • ऑपरेशन और जांच की आधुनिक सुविधा नहीं मिल पाती है। 

लेकिन इन सब से अलग बीमारी का समाधान जरूर हो जाता है बिना किसी साइड इफेक्ट के ।

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